चौकीदार तेरी ऐसी चौकीदारी पर लानत है ~ इमरान प्रतापगढ़ी

political shayari

तेरे हर झूठे वादे पर मक्कारी पर लानत है,
देश में फैली नफ़रत वाली बीमारी पर लानत है!
देश लूटकर रोज़ लुटेरे नाक के नीचे भाग रहे,
चौकीदार तेरी ऐसी चौकीदारी पर लानत है !!

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याद है इक जुमले पर जब क़ुर्बान गई है ये जनता,
रूठी ! तो फर्जी़ ऑंसू पर मान गई है ये जनता !
ललित से नीरव मोदी तक पर ख़ामोशी ही ख़ामोशी
किसके अच्छे दिन आये अब जान गई है ये जनता !!

पूँजीपतियों से सन्यासी की यारी पर लानत है ।।
चौकीदार तेरी ऐसी चौकीदारी पर लानत है !!
याद करो वो जुमला न खाने दूँगा ना खाऊँगा
वतन पे ऑंच गई तो फिर लाहौर तलक चढ जाऊँगा !


हर दिन बेचारा सैनिक सरहद पर मारा जाता है
तुम कहते थे एक सर के बदले में दस सर लाऊँगा !
छप्पन इंची वाली ऐसी दमदारी पर लानत है !!
चौकीदार तेरी ऐसी चौकीदारी पर लानत है !!